कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ के कैडेट्स के साथ संवाद के दौरान अपने सैन्य जीवन और खेल यात्रा से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कठिन परिस्थितियों में अनुशासन, निरंतर प्रयास और सही निर्णय व्यक्ति को अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करते हैं।
कश्मीर में सैन्य सेवा से मिली सीख
राज्यवर्धन राठौड़ ने भारतीय सेना में अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए कैडेट्स को बताया कि सैन्य जीवन ने उन्हें अनुशासन, धैर्य और जिम्मेदारी का महत्व समझाया। कश्मीर सहित चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सेवा के दौरान मिले अनुभवों ने उनके व्यक्तित्व और सोच को आकार दिया।
उन्होंने कैडेट्स को यह संदेश दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखना जरूरी है।
सैन्य सेवा से ओलंपिक तक
सेना में सेवा के दौरान शूटिंग के प्रति उनकी रुचि आगे बढ़ी और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2004 के एथेंस ओलंपिक में उन्होंने पुरुषों की डबल ट्रैप शूटिंग स्पर्धा में रजत पदक जीता।
कैडेट्स से बातचीत में उन्होंने अपने खेल सफर से जुड़े अनुभव बताते हुए कहा कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार अभ्यास और प्रक्रिया पर ध्यान देना जरूरी है।
सफलता के लिए अनुशासन और निरंतर प्रयास
राठौड़ ने कैडेट्स को सफलता के लिए पढ़ने की आदत, बेहतर संवाद कौशल, टीमवर्क और नेतृत्व क्षमता विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने असफलताओं को सीखने का अवसर मानने और गलतियों से आगे बढ़ने पर भी जोर दिया।
उनका संदेश था कि भविष्य केवल परिस्थितियों से तय नहीं होता। व्यक्ति के निर्णय, मेहनत और जिम्मेदारी लेने की क्षमता उसके सफर को दिशा देती है।
सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में कैडेट्स के साथ उनका यह संवाद युवाओं को अनुशासन, नेतृत्व और लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास का महत्व समझाने पर केंद्रित रहा। उनकी सार्वजनिक गतिविधियों से जुड़ी अन्य जानकारी News & Updates पर देखी जा सकती है।














